छठ पूजा का इतिहास क्या है और छठ पूजा क्यों मनाया जाता है

छठ त्यौहार क्यों मनाया जाता और छठ त्यौहार का इतिहास क्या है ? भारत एक धार्मिक देश है । यहां आपको तरह तरह के त्यौहार हर माह देखने को मिल जाएगा ।लगभग हर त्यौहार में किसी न किसी देवता की पूजा जरूर की जाती है , उन्हें खुश रखने के लिए उपवास रखा जाता है ।
छठ पूजा भी उसमें से एक है , यह दिवाली के कुछ दिनों बाद मनाई जाने वाली त्यौहार है । इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है ।
ऐसा कहा जाता है कि माता छठ ,भगवान सूर्य की बहन है और माता छठ को प्रशन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना करना  आवश्यक है । यह त्यौहार आज से नहीं बल्कि माना जाता है कि महाभारत और रामायण काल से माना जाता है । इससे संबंधित बहुत से पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं ।
पहले माना जाता था कि यह त्यौहार केवल बिहार राज्य में माना जाता था । पर वक्त के साथ भारत के अन्य राज्यो में भी इसे मनाया जाने लगा ।
छठ त्यौहार दिवाली के बाद पूरे भारत भर में मनाया जाने वाला बहुत ही प्रचलित त्यौहार है जो कि खास तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे ज्यादा मनाया जाने वाला त्यौहार है ।
जब से दिवाली का त्योहार आता है ऐसा लगता है जैसे एक के बाद एक त्यौहार आ ही रहे हैं । तभी तो दिवाली में धनतेरस , गोवर्धन पूजा , भाईदूज , छठ जैसे एक के बाद एक त्यौहार आते रहती हैं ।
वैसे तो 2018 के इस नवम्बर माह को त्योहारों का महीना कहा जाता है क्योंकि इस महीने बहुत से त्यौहार मनाया जाता है । आज हम छठ पूजा के इतिहास के बारे में जानेंगे । यह पूरे भारत में मनाया जाने वाला त्यौहार है इससे संबंधित बहुत से कहानियां प्रचलित हैं । छठ पूजा से संबंधित जितनी भी कहानियां प्रचलित हैं वो अलग अलग जगह अलग अलग मानी जाती है ।
हम इस पोस्ट में आपको  सभी संबंधित वो सभी कहानियां उपलब्ध कराएंगे जो सबसे ज्यादा प्रचलित है ।

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[1] छठ पूजा क्यों मनाया जाता है और छठ पूजा का इतिहास से संबंधित कहानी - 1


यह एक पौराणिक कहानी है और यह ऐतिहासिक कहानी आपको बहुत जगह पढ़ने और सुनने को मिल जाएगी । यह कहानी राजा प्रियवंद से संबंधित है । कहा जाता है कि राजा प्रियवंद की कोई भी संतान नहीं थी ।
राजा संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप के पास गए  तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ। इससे उन्हें बहुत गहरा ठेस पहुंचा । राजा प्रियंवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा से कहा कि क्योंकि वो सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं, इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं। उन्होंने राजा को उनकी पूजा करने और दूसरों को पूजा के लिए प्रेरित करने को कहा।राजा प्रियंवद ने पुत्र इच्छा के कारण देवी षष्ठी की व्रत किया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। कहते हैं ये पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी और तभी से छठ पूजा होती है। कहा जाता है कि इस पूजा के बाद से हर वर्ष इसी दिन यह पूजा की जाती है , पूरे भारत में छठ का पूजा बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और भगवान सूर्य की पूजा की जाती है ।

[2] छठ पूजा क्यों मनाया जाता है और छठ पूजा का इतिहास से संबंधित कहानी - 2


यह कहानी महाभारत से संबंधित है । ऐसी मान्यता है कि जब कौरवों और पांडवों के बीच जुआ चल रहा था तब पांडव जुआ  में अपनी जमीन , धन - दौलत सब कुछ हार गए थे और 12 वर्ष के वनवास के लिए भेज दिए गए थे । कहा जाता है कि तब इसी दिन द्रोपती ने अपने पति के धन - संपत्ति और वो सब जो जुआ में हारे थे सब वापस पाने के लिए पूजा की थी और कुछ सालों बाद पांडवों को उनका सबकुछ वापस मिल गया था । तब से आज तक छठ पूजा का त्यौहार पूरे देश के मनाया जाता है ।

[3] छठ पूजा क्यों मनाया जाता है और छठ पूजा का इतिहास से संबंधित कहानी -3


बिहार में मुंगेर नाम के क्षेत्र में माता सीता ने सबसे पहले इस त्योहार को मनाया था। प्रभु श्रीराम अपने पिता की वचनपूर्ति के लिए माता सीता के साथ वनवास गए लेकिन माता सीता के मन में वनवास के दौरान आने वाले संकटों के लिए काफी शंकाएं थी। वनवास के शुरुआती समय में श्री राम और माता सीता मुद्ल ऋषि के आश्रम में रहे, वहीं पर माता सीता ने गंगा में छठ की पूजा की शुरुआत की थी।

वनवास खत्म होने पर जब प्रभु राम अयोध्या लौटे तो रामराज्य के लिए राजसूय यज्ञ करने का निर्णय लिया गया। बाल्मीकि ऋषि ने सीता से कहा कि मुद्ल ऋषि के आए बिना यह यज्ञ असफल रहेगा।

जब प्रभु राम और सीता माता मुद्ल ऋषि को निमन्त्रण देने गए तो उन्होंने उन्हें छठ का व्रत रखने की सलाह दी। इसी तरह मां सीता ने छठ माता से पुत्र प्राप्ति की कामना भी की।

[4] छठ पूजा क्यों मनाया जाता है और छठ पूजा का इतिहास से संबंधित कहानी -4


एक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। इसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वो रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने।
आप सभी को भी पता होगा कि सूर्य प्राणियों की ऊर्जा का स्रोत है । इससे उन्हें ऊर्जा मिलती है इसलिए भी बहुत से जगहों में इस मान्यता के साथ छठ पूजा मनाया जाता है ।

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